बड़बिल, 28 अगस्त (शिबाशीष नंदा) –ओडिशा के लौह अयस्क खनन क्षेत्र में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जोड़ा खनन मंडल के अधीन बहुराष्ट्रीय कंपनी अर्सेलर मित्तल इंडिया प्रा. लि. की ठाकुराणी खदान में लौह अयस्क ग्रेड में हेराफेरी के गंभीर आरोप लगे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, खदान से दुबुना स्थित निजी प्लांट को भेजे जा रहे अयस्क की ग्रेडिंग में बड़ा अंतर पाया गया। ट्रांजिट पास (टीपी) में 58% ग्रेड दर्शाया गया था, जबकि खान विभाग की जांच में 61% से अधिक ग्रेड का उच्च गुणवत्ता वाला लौह अयस्क ट्रकों में भरा पाया गया। 21 अगस्त को दो ट्रक जब्त कर उनके सैंपल की केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट आने के बाद यह मामला उजागर हुआ।
लेकिन, आरोप है कि एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी खान विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। जब्त ट्रक अभी भी बड़बिल थाने में खड़े हैं, जिससे वाहन मालिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसको लेकर ट्रांसपोर्ट कंपनियों और वाहन मालिकों में तीव्र असंतोष फैल गया है। ट्रक मालिक पिछले तीन दिनों से खदान के सामने धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि हेराफेरी के लिए खदान कंपनी जिम्मेदार है, लेकिन नुकसान उन्हें झेलना पड़ रहा है।
इस बीच, बड़बिल सिविल सोसाइटी ने गुरुवार को कंपनी और खान विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। सिविल सोसाइटी के सदस्य इंद्रमणि बेहेरा ने कहा कि इस तरह की खनन चोरी पहले से चल रही थी, मगर अब यह खुलकर सामने आई है। उनके अनुसार, इस हेराफेरी से सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है। उन्होंने मांग की कि मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और मित्तल की खदान को तुरंत सस्पेंड किया जाए।
दूसरी ओर, अर्सेलर मित्तल कंपनी के अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि “परिवहन केवल स्टैक एनालिसिस रिपोर्ट के बाद ही किया जाता है, इसमें कंपनी की कोई गलती नहीं है।” अब सवाल यह है कि गलती कहां हुई – रिपोर्टिंग में या जानबूझकर खनन चोरी को ढकने का प्रयास हो रहा है? इस पर सभी की निगाहें टिक गई हैं।
यह मामला खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।