सीमावर्ती खनन क्षेत्र में खुलेआम बिक रही नकली और अवैध शराब, पुलिस व आबकारी विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
बोलानी, 10 जून (स्वतंत्र प्रतिनिधि):
राज्य सरकार द्वारा अवैध नशा कारोबार पर रोक लगाने के लिए लगातार अभियान चलाए जाने के बावजूद, केन्दुझर जिले के सीमावर्ती खनन क्षेत्र बोलानी थाना क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार दिन-ब-दिन तेजी से फैलता जा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब इस पूरे नेटवर्क को लेकर पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका पर ही सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहां एक ओर खुलेआम अवैध देसी-विदेशी शराब की बिक्री हो रही है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय मौन साधे हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि इस मुद्दे पर कई बार “पब्लिक पुलिस बैठक” में चर्चा होने और मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
गली-गली में शराब, नाबालिग भी बन रहे शिकार
बोलानी क्षेत्र के शांतिनगर, गुरुद्वारा हटिंग, बाकराडीपा, अत्री हटिंग, शंखझर, लसरदा, हरमठ, किरीबुरु बेस कैंप और हिलटॉप जैसे इलाकों में अवैध शराब आसानी से उपलब्ध है। नतीजतन, कम उम्र के बच्चे और युवा तेजी से नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। इससे न सिर्फ उनका भविष्य अंधकारमय हो रहा है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।
लाइसेंसी दुकानों से हो रही सप्लाई, नकली शराब का खतरा
सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में मौजूद दो अधिकृत विदेशी शराब दुकानों—एक बालागोड़ा बस्ती (ऑफ शॉप) और दूसरी डर्बी चौक (ऑन शॉप)—से बड़े पैमाने पर अवैध सप्लाई की जा रही है। इसके अलावा, पड़ोसी राज्य झारखंड से भी मिलावटी शराब की तस्करी कर यहां बेची जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह शराब निर्धारित मूल्य से कहीं अधिक कीमत पर बेची जाती है, और इसमें संबंधित विभागों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।
अपराध और पारिवारिक कलह में बढ़ोतरी
अवैध शराब के बढ़ते प्रचलन का सीधा असर क्षेत्र की कानून-व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। चोरी, मारपीट और अन्य आपराधिक घटनाओं में वृद्धि हो रही है। वहीं, नशे की लत के कारण पारिवारिक कलह और घरेलू हिंसा के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं।
खुलेआम चल रही अवैध दुकानें, विभाग बना मूकदर्शक
कुछ स्थानों पर अवैध शराब की दुकानें इस तरह संचालित हो रही हैं मानो वे लाइसेंसी बार हों—जहां लोगों को बैठाकर शराब पिलाई जा रही है। इसके बावजूद पुलिस और आबकारी विभाग की निष्क्रियता समझ से परे है।
कार्रवाई की मांग तेज
बुद्धिजीवी वर्ग और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि यदि पुलिस और आबकारी विभाग संयुक्त रूप से छापेमारी करें और लाइसेंसी दुकानों की भी सघन जांच की जाए, तो नकली शराब के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है। साथ ही, अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
बोलानी में अवैध शराब का बढ़ता जाल केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि समाज के भविष्य के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक चुप्पी साधे रहता है और कब ठोस कार्रवाई कर जनता को राहत देता है।