बोलानी, 21 मार्च (स्वतंत्र प्रतिनिधि): केन्दुझर जिला के सीमावर्ती खनन क्षेत्र बोलानी स्थित दक्षिण-पूर्व रेलवे के अधीन बोलानी खदान रेलवे स्टेशन वर्षों से उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि इस स्टेशन से रेलवे विभाग को हर साल हजारों करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है, बावजूद इसके यहां के लोगों को एक यात्री ट्रेन की सुविधा तक नसीब नहीं हो पा रही है।
स्थानीय जनता और बोलानी विकास परिषद पिछले एक दशक से टाटा–बड़बिल पैसेंजर ट्रेन को बोलानी तक विस्तारित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन रेलवे प्रशासन इस मांग पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया है।
इतना ही नहीं, खनन क्षेत्र की लाइफलाइन मानी जाने वाली हावड़ा–बड़बिल जनशताब्दी एक्सप्रेस भी पिछले एक वर्ष से निर्धारित समय सारिणी के अनुसार संचालित नहीं हो रही है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद रेलवे विभाग की ओर से कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
बोलानी विकास परिषद के संयोजक शुभाशिष नंदा ने आरोप लगाया कि दक्षिण-पूर्व रेलवे बोलानी खदान स्टेशन से हर वर्ष भारी राजस्व अर्जित करने के बावजूद क्षेत्र के प्रति सौतेला व्यवहार कर रहा है। वर्ष 1961 से पूर्णतः क्रियाशील यह स्टेशन आज भी यात्री सुविधाओं के मामले में पिछड़ा हुआ है।
उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों से लगातार ट्रेन विस्तार की मांग को लेकर आंदोलन और आर्थिक अवरोध भी किए गए, लेकिन रेलवे प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
वर्तमान स्थिति यह है कि बोलानी, बालागोड़ा और झारखंड के किरिबुरू क्षेत्र के 25 हजार से अधिक लोग रोजाना विभिन्न कार्य के लिए जमशेदपुर (टाटा) की यात्रा करते हैं। लेकिन ट्रेन पकड़ने के लिए उन्हें 10 किलोमीटर दूर बड़बिल जाना पड़ता है।
ट्रेन सुबह तड़के होने के कारण कई यात्रियों को एक दिन पहले ही बड़बिल स्टेशन पहुंचकर प्लेटफॉर्म पर रात गुजारनी पड़ती है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रेल मार्ग से बोलानी और बड़बिल के बीच दूरी मात्र 5–6 किलोमीटर ही है, इसके बावजूद ट्रेन सेवा का विस्तार नहीं होना लोगों में गहरी नाराजगी का कारण बन रहा है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता और रेलवे विभाग की उदासीनता के चलते यह समस्या वर्षों से जस की तस बनी हुई है। यदि जल्द ही टाटा–बड़बिल पैसेंजर ट्रेन को बोलानी तक बढ़ाया जाता है, तो हजारों लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।